कैसे होता है जमीन का रजिस्ट्रेशन? क्या होती है रजिस्ट्री ? | Approx Property

कैसे होता है जमीन का रजिस्ट्रेशन? क्या होती है रजिस्ट्री ? | Approx Property

क्या होती है रजिस्ट्री (Registry)?

प्रॉपर्टी खरीदने पर उसके मालिकाना हक को Seller  से Buyer के पक्ष में transfer करवाना ही रजिस्ट्री (Registry) कहलाता है|

साधारण शब्दों में कहें तो किसी जमीन, Plot, Flat, Home  के मूल दस्तावेजों पर उसके Seller का नाम हटाकर Buyer के नाम दर्ज कराना ही रजिस्ट्री है,

भारत में रजिस्ट्री एक Legal process है, जिसके आधार पर ही जमीन की खरीद-फरोख्त चलती है|

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आपने अक्सर लोगों को जमीन खरीदते या बेचते हुए देखा होगा, या फिर जमीन की buy or sale से संबंधित बातचीत करते तो सुना ही होगा,

अपने जीवन में व्यक्ति जमीन को काफी महत्व देता है. इतना ही नहीं, इसके लिए लोग अपने जीवन भर की कमाई दाव पर भी लगा देते हैं, तब जाकर जीवन की सबसे महंगी खरीद (जमीन की खरीददारी) की जाती है, लोग अपनी जमा पूंजी में Bank balance, Gold-Silver, Business profit के अलावा property को भी शामिल करते हैं| 

इस संपत्ति में अधिकांश लोग जमीन को तरजीह देते हैं, यह जमीन आखिरकार कैसे खरीदी जाती है? 

जमीन का रजिस्ट्रेशन कैसे करवाया जाता है? 

रजिस्ट्री कैसे होती है?

जमीन के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया, सेल डीड (Sale Deed) कैसे होती है रजिस्टर्ड?

जमीन खरीदने के लिए लोगों को रजिस्ट्री करानी होती है| रडिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया बैनामा (Sale Deed) रजिस्टर्ड करने पर पूरी होती है| 

सबसे पहले जमीन का Buyer और Seller को आपसी सहमति से बैनामा तैयार करवाना होता है, इसके बाद इस Sale deed के आधार पर Online Registration किया जाता है, जिस जमीन की रजिस्ट्री की जा रही है, उसके दस्तावेज और क्रेता-विक्रेता के फोटो आदि ऑनलाइन सबमिट कर देते हैं|

Online form सबमिट होने के बाद एक registration number मिलता है. इस registration number के साथ सेल डीड को लेकर रजिस्ट्री ऑफिस पहुंचना होगा, जहां सब रजिस्ट्रार जांच आदि के बाद sale deed को रजिस्टर्ड कर देते हैं, वैसे तो मुहर (stamp, seal)आदि लगाकर औरिजनल (Original) sale deed उसी दिन वापस कर दिया जाता है, लेकिन यह sale deed खरीददारी को अगले दिन भी दिया जा सकता है|

किस तरह के (Deed) से जमीन हो सकती है ट्रांसफर:

  1. बैनामा (Sale Deed) – Buyer और  Seller मिलकर तहसील में जमीन खरीदने और बेचने के लिए सेल डीड तैयार करवाते हैं. यह एक तरह से दोनों पार्टियों (क्रेता-विक्रेता) द्वारा किये गए समझौते का कानूनी विलेख होता है, जो संपत्ति के सौदे को दर्शाता है. इसमें क्रेता-विक्रेता की समस्त जानकारी, संबंधित जमीन, नक्शा, गवाह, स्टांप आदि होते है| इस डीड में समझौते की उन शर्तों को शामिल किया जाता है. जिन पर बिक्री निर्धारित हुई है. इसके जरिए ही Seller buyer को जमीन का अंतिम कब्जा देता है|
  2. दानपत्र (Gift Deed) – दानपत्र में जमीन का मालिक किसी को उस जमीन का मालिकाना हक दान के रूप में देता है. दानपत्र के जरिए भी लोग अपनी जमीन का Transfer किसी अन्य को कर सकते हैं.
  3. वसीयत (Will)- किसी जमीन की वसीयत करने के लिए लोगों को स्टांफ खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती है. लोग 100 रुपये के स्टांप पर वसीयत टाइप कराते हैं. हालांकि कानून में इसकी जरूरत नहीं है.
  4. पॉवर ऑफ अटार्नी (Power Of Attorney)– Property Transfer का चौथा डाक्यूमेंट है Power of Attorny. यह Document 100 रुपये के स्टांप पर तैयार किया जाता है. कोई भी आदमी अपनी पॉवर को किसी दूसरे आदमी को इसी के सहारे ट्रांसफर करता है|

काफी फायदेमंद साबित होता है इकरारनामा-

Sale deed कराने से पहले कानून में इकरारनामा का भी Process है, इसका उपयोग करके लोग तमाम झंझटों से बच जाते हैं| यह लोगों के लिए काफी फायदेमद साबित होता है. इकरारनामा के तहत Buyer-seller जमीन बिक्री का एक एग्रीमेंट बनवा लेते हैं, जिस एग्रीमेंट में buyer और seller की सहमति होती है, इसमें वह जानकारी खोली जाती है, जिसके आधार पर buyer जमीन खरीदने और Seller जमीन बेचने पर तैयार हुआ है| इस agreement में जमीन की Market value का 2.5 प्रतिशत stamp duty देनी होती है|

हालांकि sale deed के समय agreement में खरीदे गए स्टांप कम किये जाते हैं. इसका मतलब यह है कि जमीन के स्टांप खरीद में agreement के 2.5 प्रतिशत वाले स्टांप भी जुड़ जाते हैं|

यह है रजिस्ट्री की प्रक्रिया-

सबसे पहले संपत्ति या जमीन की मार्केट वैल्यू निर्धारित की जाती है. इसके बाद स्टाम्प पेपर खरीदे जाते हैं. रजिस्ट्री से पहले इन स्टांप पेपर पर ही sale deed टाइप कराया जाता है, Stamp duty जमीन के मालिक के लिए मालिकाना सबूत के तौर पर   होती है|

Sale deed के दौरान जमीन की खरीद-बिक्री के लिए वर्तमान मालिक और खरीदने वाले व्यक्ति की सारी जानकारी दर्ज की जाती है, इसके बाद रजिस्ट्रेशन कराया जाता है. रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री करवाई जाती है, रजिस्ट्री में दो गवाह की भी जरूरत पड़ती है, जिनके फोटो, आईडी कार्ड और हस्ताक्षर sale deed में शामिल किये जाते हैं|

जमीन से जुड़े जरूरी दस्तावेज के साथ दोनों पार्टियों की पहचान संबंधी कागजात   भी दिये जाते हैं, रजिस्ट्री के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय से एक पर्ची मिलती है, जो काफी मायने रखती है, हमेशा इस पर्ची को संभालकर रखना चाहिए, पर्ची मिलने का मतलब रजिस्ट्री पूरी हो गई है. अब खरीददारी को संबंधित खरीदी हुई जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा|

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